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होम | लाइफस्टाइल गुर्दे की बीमारी से बचना है, तो अपनाएं ये छोटे-छोटे पर काम के नियम…

गुर्दो के रोग पाचनतंत्र के विकार और हड्डियों के रोग से जुड़े होते हैं और यह पेरिफेरल वस्कुलर रोगों, दिल के रोगों और स्ट्रोक जैसी बीमारियों के लिए बड़े खतरे का कारण होते हैं.

गुर्दे शरीर की कार्यप्रणाली में अहम होते हैं. मानव शरीर में दो गुर्दे होते हैं और गुर्दो में खराबी किसी भी उम्र हो सकती है. इसके सामान्यत: दो कारण होते हैं- डायबिटीज और हाईब्लड प्रेशर हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इन्हीं कारणों से यह समस्या होती है. डायबिटीज और हाईब्लड प्रेशर के अलावा दिल का रोग भी एक कारण होता है. ऐसे में गुर्दे संबंधी रोग से बचने का उपाय तो अपनाएं ही, साथ ही कुछ छोटे-छोटे नियम अपनाकर भी गुर्दे की बीमारी से बचा जा सकता है-

ब्लड प्रेशर पर रखें नजर
गुर्दे तंदुरुस्त और सक्रिय रहेंगे, तो आपका रक्तचाप कम रहता है, जो गुर्दो की सेहत बनाए रखता है. ब्लड प्रेशर की निगरानी रखें. यह गुर्दो की क्षति का आम कारण होते हैं. सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 होता है. 128 से 89 को प्रि-हाईपरटेंशन माना जाता है और इसमें जीवनशैली और खानपान में बदलाव करना होता है. 140/90 से अधिक होने पर अपने डॉक्टर से खतरों के बारे में बात करें.

ब्लड शुगर रहे कंट्रोल में:
यह जरूरी है कि आप अपने ब्लड शुगर को नियमित रूप से नियंत्रित रखें, क्योंकि डायबिटीज वाले लोगों के गुर्दे खराब होने का खतरा रहता है. अगर आप चाहते हैं कि आपके गुर्दे सेहतमंद रहें और उनमें कोई परेशानी न हो. तो इस बात का ध्यान रखें कि आपका ब्लड शुगर सही रहे. वह न कम हो न ही ज्यादा.

आहार पर दें ध्यान:
जरूरी है कि आप सेहतमंद खाएं और वजन नियंत्रित रखें. अपने खाने में नमक की मात्रा कम रखें. नमक का सेवन घटाएं, प्रतिदिन केवल 5 से 6 ग्राम नमक ही लेना चाहिए. इसके लिए प्रोसेस्ड और रेस्तरां से खाना कम से कम खाएं और खाने में ऊपर से नमक न डालें. अगर आप ताजा चीजों के साथ खुद खाना बनाएं, तो इससे बचा जा सकता है.

उचित तरल आहार लें:
हम हमेशा से सुनते आ रहे हैं कि रोज डेढ़ से दो लीटर यानी तीन से चार बड़े गिलास पानी पीने चाहिए. यह आपकी सेहत के लिए बहुत ही अच्छा माना गया है. भरपूर पानी पीने से गुर्दो से सोडियम, यूरिया और जहरीले तत्व साफ होते हैं. इससे गुर्दों के लंबे रोग पैदा होने का खतरा काफी कम हो जाता है. लेकिन जरूरत से ज्यादा तरल भी न लें, क्योंकि इसके प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं. गुर्दे की सेहत अच्छी बनाए रखने के लिए शरीर में पानी की उचित मात्रा रखनी होती है. इससे गुर्दो की लंबी बीमारी का खतरा बेहद कम हो जाता है.

जरूरी है समय-समय पर जांच:
गुर्दो के क्षतिग्रस्त होने का पता लगाने के लिए पेशाब की जांच और गुर्दे कैसे काम कर रहे हैं, इसके लिए रक्त की जांच की जाती है. पेशाब की जांच से एल्बुमिन नामक प्रोटीन का पता चलता है, जो सेहतमंद गुर्दो में मौजूद नहीं होता. रक्त जांच ग्लूमेरुलर फिल्ट्रशन रेट की जांच करता है. यह गुर्दो की फिल्टर करने की क्षमता होती है. 60 से कम जीएफआर गुर्दो के गंभीर रोग का संकेत होता है. 15 से कम जीएफआर गुर्दो के फेल होने का प्रमाण होता है.

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